काश तू यहाँ आयी रहती
इस दिल पर तू छायी रहती
तुम सा कोई ना होता दूजा
तन्हा
कभी न रात रहती
सब् रहते गुमसुम गुमसुम
चान्द् भी रहता मधम मधम
प्यार का तरनुम रहता
मै भी चलता उन तन्ग गलीयो मे
उन अन्धेरी रातो मे
दिल् की हर बातो मे
मौसमी मुलाकातो मे ||
खुश होता मै भी
हसता मै भी
पर अब तो तन्हा राते है
अधुरी सी बाते है
दिल् का जखम है गहरा
खो गया वो चान्द्
खो गयी वो रात
खामोश सी लगती हर फ़िज़ा
सोचता हु बस यही बात
काश तु यहा आयी रहती


